Acai Berry Information
Monday, April 13, 2009
This grape like South American berry has even been spotlighted on such shows as Rachael Ray and Oprah. The Acai Berry has been highly endorsed as a weight loss supplements by some of the leading specialist in the world.
Some specialist also contribute heart health and weight loss to these compounds. The dietary fiber also is great at protecting your heart. The acai berry is also high in protein and dietary fiber.
With recent spotlights on such television shows as Oprah and Rachael Ray, production has increased and this supplement is readily available worldwide. The acai berry has been hard to find in the
posted by Brijesh @ 3:21 AM,
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Best Option to Unlock iphone3g
Thursday, April 2, 2009
The manufacturers to open kits give a chart of sim of iphone open the called superb chart of turbo SIM to open your iphone. Unlocking iphone comes with advanced software tools to unlock iphone2.2. With the toll pack of unlock iphone3g you obtain a free wallpaper of iphone, iphone ulock software by which you can open any number of iphones. You also obtain for your iphone a free ringtone maker. iphone unlock tools is the kits will correctly make all the application requests of your iphone and user data will be also saved by the tools.
All the users these toolkit that are using it, are recommended not to employ any unknown software to iphone unlock while it can by default bring to your iphone. The application of these toolkit of unlock iphone 3g is very easy and you do not need any downloading to run the iphone.
posted by Brijesh @ 5:48 AM,
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समाधान
Wednesday, December 31, 2008
मैं पत्नी के साथ बैठा चाय पी रहा था। पत्नी बोली, ए जी, सुनो, किचन का नल लीक करने लगा है, उसे जल्दी ठीक करवा दो, कहते हैं पानी टपकता रहने से घर में धन नहीं टिकता। मैंने कहा, ठीक है, करवा दूंगा, अच्छी बात है.. पर यह क्या बात हुई कि पानी टपकते रहने से घर में धन नहीं टिकता..। यह कहते-कहते ही मुझे अपने पडोसी दोस्त राधेश्याम का ध्यान आ गया। मैं कई बार उसे समझा चुका था कि घर का नल खुला मत छोडा करें, पानी व्यर्थ न बहने दें.. और इसके लिए सैकडों दलीलें भी दी थीं, परन्तु उसने नल बन्द करने की आदत नहीं डाली थी। आज मुझे इस समस्या का समाधान मिल गया था। अब उसका नल बन्द रहता है। -[पंकज शर्मा]
posted by Brijesh @ 5:26 PM,
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गया साल
छोड कर फिर कई सवाल, गया साल! पंख नोची हुई तितलियां हैं रेत में हांफती मछलियां हैं धूप लेटी हुयी निढाल गया साल! हर तरफ दहशतों भरा मौसम जागती रातें हैं नींदें कम, स्वप्न रखें कहां सम्हाल गया साल! हर तरफ धुंध है, कुहासा है गांव-घर में बसी हताशा है, खून के सर्द हैं उबाल गया साल! -[डा. हरीश निगम]
posted by Brijesh @ 5:23 PM,
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नव वर्ष

विगत वर्ष की असीम सुभ कामनाओं, आशाओं को लेकर गत वर्ष के प्रथम प्रभात बेला मैं रवि किरणे सुभकामना, मंगलता, उत्तमता का संदेश लायें हम सब के जिन्दगी मैं..
posted by Brijesh @ 5:04 PM,
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दोस्ती में
Monday, November 3, 2008

दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रेहने का..
बल्कि दोस्त ही जिन्दगी बन जाते हैं, दोस्ती में..
जरुरत नहीं पडती, दोस्त की तस्वीर की.
देखो जो आईना तो दोस्त नज़र आते हैं, दोस्ती में..
येह तो बहाना है कि मिल नहीं पाये दोस्तों से आज..
दिल पे हाथ रखते ही एहसास उनके हो जाते हैं, दोस्ती में..
नाम की तो जरूरत हई नहीं पडती इस रिश्ते मे कभी..
पूछे नाम अपना ओर, दोस्तॊं का बताते हैं, दोस्ती में..
कौन केहता है कि दोस्त हो सकते हैं जुदा कभी..
दूर रेह्कर भी दोस्त, बिल्कुल करीब नज़र आते हैं, दोस्ती में..
सिर्फ़ भ्रम हे कि दोस्त होते ह अलग-अलग..
दर्द हो इनको ओर, आंसू उनके आते हैं , दोस्ती में..
माना इश्क है खुदा, प्यार करने वालों के लिये "अभी"
पर हम तो अपना सिर झुकाते हैं, दोस्ती में..
ओर एक ही दवा है गम की दुनिया में क्युकि..
भूल के सारे गम, दोस्तों के साथ मुस्कुराते हैं, दोस्ती
Labels: अनुभूति, इजहार, चिन्तन, रिश्ता, सफ़र
posted by Brijesh @ 7:41 PM,
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लौट आओ प्रिया
Monday, July 21, 2008
प्रिया को उसके शैतान होने का पूर्वाभास था। वह उससे थोडी दूरी बनाकर रहती थी। परंतु मौका पाकर उसने काट ही लिया और ऐसा जख्म, ऐसा दर्द दिया जो भरने का नाम ही नहीं ले रहा था। कह सकते हैं कि बालमन भी कुछ हद तक दोषी था। बहुत कुछ अकेले अंधेरे में बैठकर सोचने के बाद उसे केवल एक ही रास्ता नजर आ रहा था। रास्ता कठिन था, पर पापा ने सिखाया था कि कठिन रास्तों पर चलने से डरना या घबराना नहीं चाहिए। मां और पापा का आज घर पर न होना किसी आशीर्वाद से कम न था।
प्रिया ने तनिक भी देरी न की और नींद की गोलियों से भरी शीशी, पापा की अलमारी से निकालकर अपने सामने टेबल पर रख ली। फिर भूगोल की कापी से बीच के दो सादे पन्ने फाड लिए। भूगोल प्रिया का सबसे प्रिय विषय था। उसने कापी के कुछ पन्ने पलटे। एक जगह लिखा था पृथ्वी वास्तविकता में समतल नहीं है। कुर्सी पर बैठे हुए ही अपने नंगे पैर ठंडी फर्श पर सहलाए। वास्तव में वह बेहद अद्भुत अनुभव था।
उसने टेबल पर रखी हुई कलम उठाई। कमल के फूल के रंग की उस कलम पर भगवान श्रीकृष्ण की आकृति सुशोभित थी। सबसे प्रिय सहेली श्वेता ने ही तो पिछले जन्मदिन पर उपहार स्वरूप दी थी। वादा किया था प्रिया ने कलम को मरते दम तक अपने पास रखने का। उस वक्त शायद मजाक में कह दिया होगा, परन्तु श्रीकृष्ण ने ऐसा खेल खेला कि वादे का सिद्ध होना तय हो गया। खैर, सभी अच्छे बुरे विचारों को भूलकर उसने अपना अंतिम संदेश लिखना प्रारंभ किया- प्रिय मां पापा और विकी,
प्यार करती हूं मैं आप सबसे! जो दु:ख आपको बिस्तर पर पडा हुआ दिख रहा है उसके लिए क्षमा कर दीजिए। पापा आप हमेशा ही कहते थे कि हमें कभी भी किसी भी हाल में रोना नहीं चाहिए। पर क्या करें! इस बार हम इस समंदर में उठते ज्वार को रोक न सके।
यूं तो आप हमारे जीवन में इतना महत्व रखते हैं कि आपके कहने भर से महासागर की लहरों का भी रुख मोड सकते हैं पर जीवन के अंतिम क्षणों में पांव रखने के लिए साहिल मिलना भी नामुमकिन हो गया था। हम आपको हमें चलना सिखाने के लिए धन्यवाद नहीं देते।
हम आपको बडों का आदर करने की बातें या भक्ति के अनमोल पाठ पढाने का भी धन्यवाद नहीं देते। क्योंकि आपने ही तो सिखाया है कि सबसे अच्छे मित्रों को धन्यवाद जैसी मामूली शब्द कहकर प्रेम की भावना का निरादर नहीं करना चाहिए। पापा आप हमारे भगवान हैं।
मां! अब आपसे क्या कहूं! सारी जरूरी और गैरजरूरी बातें आपको जीवन भर बताई मैंने। कभी कुछ नहीं छिपाना चाहा। और पहली बात जो छिपानी पडी उसके लिए यह सजा चुनी है। देखो मैंने अपने माथे पर आपकी नीली वाली बिन्दी लगा रखी है। कैसी लग रही है? जानती हूं अच्छी ही कहेंगी। साथ ही यह भी कहेंगी कि लाल वाली और अच्छी लगती मुझपर। अच्छी तरह जानती हूं।
सच कहूं मां मैं आपसे माफी मांगना चाहती हूं, उस बात को न बताने के लिए। यूं तो काफी शर्मनाक होगा, पर फिर भी मैं अपनी मौत का कारण बता देती हूं। क्या प्रेम? नहीं प्रेम नहीं। घृणा। घृणा हो गई थी मुझे इस संसार से। उस दिन से, जिस दिन एक लडके ने मुझे जबरदस्ती, यकीन कीजिए, मेरी इच्छा के विरुद्ध, जबरदस्ती.. मेरे होठों को जूठा कर दिया। मेरा पढाई के अलावा किसी और चीज में कभी मन नहीं लगा। आठवीं की परीक्षाएं भी सर पर थीं। और मेरे पापा ने मुझे सिखाया भी है कि पढने लिखने से मन हटाना अपराध है। हो सकता है उसके पापा ने उसे ऐसा न सिखाया हो। या उसके पापा इस बात को खुद न जानते हों, तो उसे क्या सिखाते।
उस दिन कुछ ऐसा हुआ कि टिफिन ब्रेक के समय जब मैं किसी काम से कक्षा के अंदर आई तब वह पहले से ही वहीं था। थोडा डर लगा मुझे अंदर जाने में पर मैंने बहादुरी दिखाने का निश्चय किया। शायद मेरी भूल थी। शायद नहीं। मौका मिलते ही उसने मेरा हाथ पकडकर अपनी ओर खींचा और..।
मैंने तुरंत खुद को छुडाया। उसे जडकर एक चांटा मारा और बाहर भाग गई। उस दिन के बाद से न तो मैंने उसकी ओर देखना चाहा, और न ही उसकी मेरा सामना करने की हिम्मत ही हुई। शायद उसे अपनी भूल का एहसास हो गया था। शायद नहीं। काफी सारी बातें बाकी हैं कहने को। बेकार लोगों के बारे में बोलते रहने से समय बरबाद होता है। और समय, जैसा कि हमारे प्यारे पापा ने सिखाया है, बेहद कीमती होता है। हां विकी! यह बात मैं तुम्हारे लिए ही कह रही हूं। यूं तो तुम औरों से कहीं अधिक तेज हो पर हमेशा याद रखना कि समय बहुत महत्वपूर्ण है। इतनी बार तुमने कहा है कि तुम मुझे प्रिय हो कि अब फिर से क्या कहूं। और हां स्कूल में वो मोटू तुम्हें परेशान करता है न! अब भूत बनकर उसकी खबर लूंगी। बस देखते जाओ! बस और क्या? कभी-कभी याद कर लीजिएगा मुझे। मैं भी वहां आप सबको बहुत-बहुत याद करूंगी। टाटा!
इस प्रकार अपना अंतिम संदेश लिखने के बाद प्रिया को उन दो गौरैयों की याद आई जिन्होंने घर के बरामदे के एक कोने में बेहद कडी मेहनत के बाद अपना घोंसला तैयार किया था और मम्मी गौरैया ने दो अंडे दिए थे। कुछ देर पहले से वे दोनों गौरैयाएं काफी शोर कर रही थीं। प्रिया उन्हें भी आखिरी बार सलाम करने चल पडी। बरामदे में पहुंचकर जो नजारा उसने देखा उससे वह हतप्रभ रह गई। गौरैया के दोनों अंडे नीचे गिरकर चकनाचूर हो गए थे। कमजोर घोंसला उनका भार नहीं सह सका होगा। वे दोनों गौरैया अंडों के टुकडों के चारों ओर चक्कर लगा रहे थे और तेज आवाजें निकाल रहे थे। करुणा थी उनकी चहचहाहट में। प्रिया को यह अहसास हुआ कि बच्चों को लगी छोटी-छोटी चोटें भी मां बाप को हिला कर रख देती हैं। पर किस हद तक दर्द होता है उनके दिलों में शायद इससे वह अनजान थी। उसका दिल भर आया।
फूट-फूट कर रोने लगी प्रिया। आंसू पोंछे अपने हाथों में जो कागज के टुकडे पकड रखे थे उन्हीं से। वही कागज के टुकडे जिनपर उसका आखिरी संदेश लिखा था। इससे अधिक अब उन कागज के टुकडों का काम ही क्या था!
[प्रसून द्विवेदी]
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posted by Brijesh @ 4:02 AM,
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और 21 वीं बार में माध्यमिक पास हुई अनुपमा
Tuesday, June 3, 2008
माध्यमिक पास करने के लिए वह इतना इतनी दृढ़ संकल्प थीं कि शादी तक नहीं की। अब आशानुरूप सफलता मिली है तो काफी देर हो चुकी है। आज अनुमपा 47 वर्ष की हैं। जीवनयापन के लिये वह इलाके के एक स्कूल में सहायिका का काम करती हैं। कभी कभार बच्चों को पढ़ाती भी है। अनुपमा वैसे छात्र-छात्राओं के लिए मिसाल हैं जो परीक्षा में फेल होने के बाद सारे रास्ते बंद पाते हैं और स्वयं को खत्म कर लेते हैं।
अनुपमा ने पहली बार 1979 में माध्यमिक परीक्षा दी थी लेकिन वह फेल कर गईं। इसके बाद दूसरी बार परीक्षा दी फिर भी पास नहीं कर सकी। इस बीच माता-पिता अनुपमा पर शादी के लिए दबाव डालने लगे। दृढ़संकल्पी अनुपमा ने कहा कि जब तक वह माध्यमिक पास नहीं करेगी तब तक शादी नहीं रचाएंगी। माता-पिता को भी बेटी के इस जुनून के आगे सिर झुकाना पड़ा।
उधर, अनुपमा परीक्षा की तैयारी में जुटी रहीं। 1979 से लगातार परीक्षा देती रहीं लेकिन सफलता से दूर रहीं। आखिरकार वर्ष 2000 में सफलता मिली और माध्यमिक पास कर गईं। परंतु तब तक उसकी शादी की उम्र भी जाती रही और माता-पिता भी चल बसे। आज भी वह यह बताते हुए शर्म नहीं महसूस करतीं की उन्होंने 21 वीं बार में माध्यमिक पास की है। हंसीखुशी अपनी तमाम परीक्षाओं के प्रवेशपत्र व अन्य सर्टिफिकेट दिखाती हुए कहती हैं कि एक परीक्षा में फेल होने से सब कुछ समाप्त नहीं हो जाता।
सोर्स: जागरण.com
posted by Brijesh @ 3:31 AM,
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First love
Saturday, May 17, 2008
You changed my world,
For better or for worse
It'll never be the same.
When you came
You changed my world,
For better or for worse
It'll never be the same.
I risked my heart
And fell in love,
But my heart was broken
Thru no fault of yours.
First love
Is a strange adventure
Bringing the child
To the world of adults.
No longer a child,
The adolescent sees
How wonderful
Forever love must be
Article By.Meer
Labels: अनुभूति, आरती, आराधना, कविता, चिन्तन
posted by Brijesh @ 2:51 AM,
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Goodbye My Brother
Tuesday, April 8, 2008

for those who haven’t tried it
Death is too tragic
when destiny shows up early
Death is anything
and everything
like those enjoying wine
Death is a white sky
at night and everything is great
for those who want to imagine
Death is playing banjo
songs without time
Death is a monster movie come alive
for those that have not died
Death has no direction
Death dies out another cigarette
Death is always on vacation
Death rolls the dice
behind whispers of prayers
Death is slow motion
Death is better than sex
Death is good as long as it is somebody else
Death is a sweet symphony
when it ‘s right
Charles Lara
Labels: अनुभूति, कविता, चिन्तन रिश्ता सफ़र
posted by Brijesh @ 4:49 AM,
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